मुजफ्फरनगर : मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 ने वर्ष 2011 के चर्चित हत्या और लूटकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार दोषियों को मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। इस फैसले के साथ करीब 15 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है।
शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दोषी अनिल, सुनील, अजीत और सूरज को फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा चारों पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह वारदात 20 अगस्त 2011 की शाम करीब 7:30 बजे हुई थी। भोकरहेड़ी गांव निवासी राज सिंह अपने मित्र विजेंद्र के साथ मोटरसाइकिल से शामली जनपद के कुड़ाना गांव स्थित अपनी बहन की ससुराल जा रहे थे। रास्ते में जंगल के पास पहले से घात लगाए बैठे चार बदमाशों ने उन्हें रोक लिया।
बताया गया कि लूटपाट का विरोध करने पर आरोपियों ने राज सिंह को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद बदमाशों ने विजेंद्र के हाथ-पैर रस्सी से बांधकर उन्हें जंगल में छोड़ दिया और दोनों के पास मौजूद नकदी लूटकर फरार हो गए।
कुछ समय बाद विजेंद्र ने किसी तरह खुद को बंधनमुक्त किया और अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और विजेंद्र की तहरीर पर हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह मामला कई वर्षों तक शामली और मुजफ्फरनगर की विभिन्न अदालतों में विचाराधीन रहा, जिसके कारण सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगा।
अंततः फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में अभियोजन ने 12 चश्मदीद गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें मृत्युदंड सुनाया।

